लघुकथा-वार्ता Laghukatha-Varta

बलराम अग्रवाल के लघुकथा सम्बन्धी आलोचना व समीक्षापरक विचारों का मंच। नन्हें-से वट-बीज से निकले हुए अकेले अंकुर ने सम्पूर्ण वन में ऐसा विस्तार कर लिया है कि सारे वृक्ष उसके नीचे आ गए हैं। (गाथा सप्तशती 7/70)

शनिवार, 22 नवंबर 2025

कवि-हृदय कथाकार आचार्य जगदीश चन्द्र मिश्र / बलराम अग्रवाल

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आलेख भाग—एक आचार्य जगदीश चन्द्र मिश्र सा हित्य की कोई भी धारा एकाएक नहीं प्रारम्भ होती , वह अपने अतीत से , पूर्ववर्ती स्रोत से शक्ति और सा...

कवि-हृदय कथाकार आचार्य जगदीश चन्द्र मिश्र / बलराम अग्रवाल

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आलेख भाग—दो आचार्य जगदीश चन्द्र मिश्र         लघुकथा संग्रह ‘खाली-भरे हाथ’ (प्र . सं.1958) में 72 लघुकथाएँ संग्रहीत हैं। ‘खाली-भरे हाथ’ ...
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बलराम अग्रवाल

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बलराम अग्रवाल
'लघुकथा-वार्ता' मेरे लघुकथा-विषयक विचारों की, 'कथायात्रा' मेरी कथा-रचनाओं की प्रस्तुति है तथा 'जनगाथा' लघुकथा विधा की पत्रिका है। 'अपना दौर' में सामाजिक अनुभवों की कथेतर अभिव्यक्ति का प्रयास है। कृपया लिंक करें।
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