रविवार, 26 फ़रवरी 2017

समकालीन लघुकथा : विभिन्न आयाम-6 / बलराम अग्रवाल

छठी किस्त दिनांक 11-02-2017 से आगे…                                     
प्रमुख समकालीन लघुकथा लेखक: सामान्य परिचय-2                           
पारस दासोत14 अगस्त,   1945 को बडु (राजस्थान) में जन्म।  एक और
अभिमन्यु,   प्रयोग,   परसु,   कदम बढ़ाती चूड़ियाँ,   समक्ष,   पुस्तक की आवाज,   ईश्वर,   तेरी मेरी उसकी बात सहित अब तक 18 एकल लघुकथा-संग्रह।  लघुकथा-संग्रह
सीटीवाला रबर का गुड्डा’ का पाकिस्तान में उर्दू अनुवाद प्रकाशित,   लघुकथाओं पर छात्र-छात्राओं द्वारा पीएच.डी. तथा एम.फिल. हेतु शोध,   चित्राकला एवं मूर्तिकला  में रुचि। देहावसान : 13 सितम्बर,   2014 को जयपुर में।
प्रताप सिंह सोढी16 मार्च 1946 को मध्य पदेश के जिला इन्दौर में जन्म। शब्द संवाद (लघुकथा-संग्रह),   कुछ लघुकथा-संकलनों का सम्पादन,   देश की प्रतिष्ठित पत्रा-पत्रिकाओं में कहानियाँ,   व्यंग्य,   गजल,   संस्मरण,   आलेख व समीक्षाओं का निरन्तर प्रकाशन। लगभग सभी लघुकथा-संकलनों में लघुकथाएँ संकलित। लघुकथाओं का विभिन्न भाषाओं में अनुवाद। अनेक उर्दू तथा पंजाबी लघुकथाओं का हिन्दी में अनुवाद।  सारस्वत सम्मान,   हिन्दी साहित्य सेवी पुरस्कार।
असगर वजाहत04 जुलाई 1946 को उत्तर पदेश के जिला फतेहपुर में जन्मे असगर वजाहत के अब तक पाँच उपन्यास,   छह नाटक,   पाँच कथा-संग्रह,   एक नुक्कड़-नाटक संग्रह और एक आलोचनात्मक पुस्तक प्रकाशित हो चुकी हैं। कथा-संग्रह,   ‘दिल्ली पहुँचना है’ में 16 लघुकथाएँ संकलित हैंकुत्ते,   शेर,   डंडा,   ज-1,   मंत्रालय,   तिल,   शब्द,   वीरता,   पहचान,   चार हाथ,   कातिक,   ऊपर का आसमान,   मूल्यवान,   साझा,   ज-3,   ज-41 कथा-संग्रह ‘मैं हिन्दू हूँ’ तथा ‘मुश्किल काम’ में अनेक लघुकथाएँ संगृहीत हैं। ‘संप्रति जामिया मिलिया इस्लामिया विश्वविद्यालय,   नई दिल्ली’ में हिन्दी के विभाग में प्रोफेसर तथा वहीं पर ए.जे.किदवई मास कम्युनिकेशन रिसर्च सेन्टर के कार्यकारी निदेशक हैं।’
सतीशराज पुष्करणा06 अक्टूबर 1946 को लाहौर में जन्म। निजी व्यवसाय। साहित्य की लगभग सभी विधाओं में लेखन व संपादन दोनों। ‘दिशा’,   ‘ललकार’,   ‘व्योम’,  ‘काशें’ आदि कितनी ही अनियतकालीन पत्रिकाओं का संपादन। अनेक साहित्यिक संस्थाओं द्वारा मानद उपाधियों से सम्मानित। सन् 1988 से हर साल पटना में अन्तर्राज्यीय प्रगतिशील लघुकथा लेखक सम्मेलन का आयोजन कर रहे हैं। समकालीन हिन्दी लघुकथा के महत्वपूर्ण हस्ताक्षर।
अशोक लव13 अप्रैल,   1947   को दिल्ली में। ‘शिखरों से आगे’ (उपन्यास),  ‘लड़कियाँ छूना चाहती हैं आसमान’ (कविता-संग्रह),   ‘सलाम दिल्ली’ (लघुकथा- संग्रह),  ‘बन्द दरवाजों पर दस्तकें’,   ‘खिड़कियों पर टँगे लोग’ (सम्पादित  लघुकथा-संकलन),  ‘पत्थरों से बँधे पंख’ (कहानी-संग्रह),   ‘हिन्दी के प्रतिनिधि साहित्यकारों से साक्षात्कार’ (साक्षात्कार) के अतिरिक्त सौ से अधिक साहित्यिक/ शैक्षिक/ सम्पादित पुस्तकें प्रकाशित। अनेक सम्मान प्राप्त।
अशोक गुजराती26 जुलाई,   1947 को अकोट,   जिला अकोला (महाराष्ट्र) में जन्म। बाबा आमटे की औपन्यासिक जीवनी ‘खुशबू का अहसास’ के अतिरिक्त एक कहानी-संग्रह,   दो लघुकथा-संग्रह,   दो व्यंग्य-संग्रह,   दो आलेख-संग्रह,   आठ बाल एवं किशोर साहित्य की पुस्तकें तथा ओ. हेनरी की कहानियों के अनुवाद की एक पुस्तक प्रकाशित। केन्द्रीय हिन्दी निदेशालय,   भारत सरकार; महाराष्ट्र राज्य हिन्दी साहित्य अकादमी,   मुम्बई सहित कई संस्थाओं से पुरस्कृत/सम्मानित।
रामेश्वर काम्बोज ‘हिमांशु’इनका जन्म 19 मार्च 1949 को उत्तर प्रदेश के हरिपुर (जिला सहारनपुर) में हुआ। असभ्य नगर एवं अन्य लघुकथाएँ (लघुकथा-संग्रह),   तीन कविता-संग्रह,   एक हाइकू-संग्रह,   एक लघु उपन्यास,   एक ताँका-संग्रह,   एक व्यंग्य-संग्रह,   एक व्याकरण तथा बाल साहित्य की कई पुस्तकें प्रकाशित,   अनेक पुस्तकों का सम्पादन कर चुके हैं। केन्द्रीय विद्यालय के प्राचार्य पद से सेवानिवृत्त। लघुकथा की वेब-पत्रिका ‘लघुकथा डाॅट काॅम’ का कई वर्षों से संपादन कर रहे हैं।
मधुकांत11 अक्टूबर 1949 को हापुड़ (उ.प्र.) में जन्म। गाँव की ओर/दूसरा निश्चय (उपन्यास),   एक टुकड़ा रोटी,   विद्यासागर जिंदा है,   वी.सी.आर. बीमार है (कहानी संग्रह),   अध्यापक जीवन की कहानियाँ (सम्पादित कहानी संकलन),   तरकश (लघुकथा संग्रह),   तनी हुई मुट्ठियाँ (सम्पादित लघुकथा-संकलन),   लघुकथा के अन्य संग्रहों सहित अब तक सत्तर से अधिक पुस्तकें प्रकाशित। रक्तदान पर  विशेष कार्य,   रक्तदान प्रणेता। हरियाणा साहित्य अकादमी द्वारा पुरस्कृत।
जगदीश कश्यप समकालीन हिन्दी लघुकथा के अद्भुत हस्ताक्षर। 01 दिसंबर 1949 को गाजियाबाद में जन्म। लघुकथा की महत्वपूर्ण पत्रिका ‘मिनीयुग’ का संपादन। ‘कोहरे से गुजरते हुए’ एकल संग्रह। छोटी-बड़ी बातें (महावीरप्रसाद जैन के साथ,   1978),   विरासत तथा ‘बीसवीं सदी की चर्चित हिन्दी लघुकथाएँ’(मृत्योपरांत) संपादित संकलन प्रकाशित। लघुकथा-केन्द्रित अनियतकालीन पत्रिका ‘मिनीयुग’ का 1973 से सम्पादन-प्रकाशन।  ग्रहण पत्रिका का लघुकथा-पुरस्कार (1984)16 अगस्त 2004 को गाजियाबाद में देहावसान।
श्याम सुन्दर अग्रवाल08 फरवरी,   1950 को   कोट कपूरा (पंजाब) में। बेटी का हिस्सा (हिन्दी लघुकथा-संग्रह),   नंगे लोकाँ दा फिक्र,   मरुथल के वासी (मौलिक लघुकथा-संग्रह,   पंजाबी में)। अनुवाद: चार लघुकथा-संग्रह (हिन्दी से पंजाबी में)। सम्पादित : 27 लघुकथा-संग्रह (हिन्दी तथा पंजाबी में)। पंजाबी त्रौमासिक ‘मिन्नी’ का 1988 से लगातार सम्पादन।
मधुदीप01 मई 1950 को हरियाणा के ग्राम दुजाना में जन्म।  एक यात्रा अन्तहीनउजाले की ओर,   और भोर भई,   पराभव,   लौटने तक,   कल की बात(सभी उपन्यास),   छोटा होता आदमी (कहानी-संग्रह),   तीसरा महायुद्ध,   आसार,   एक कदम और (सम्पादित कहानी-संकलन),   तनी हुई मुट्ठियाँ,   पड़ाव और पड़ताल (सम्पादित लघुकथा-संकलन),   मेरी बात तेरी बात,   समय का पहिया  (लघुकथा-संग्रह),   ऐसे बनो बहादुर (बाल उपन्यास) प्रकाशित। लघुकथा संकलन की महत्वपूर्ण शृंखला ‘पड़ाव और पड़ताल’ के संयोजक/सम्पादक तथा दिशा प्रकाशन के संचालक-प्रबंधक।
विष्णु नागर14 जून 1950 को इंदौर में जन्म। इन्होंने साहित्य की लगभग सभी विधाओं में लेखन किया है। व्यंग्य पर गहरी पकड़। एक ही पात्रा अथवा स्थिति को लेकर शृंखलाबद्ध लघुकथाओं के लेखन में सिद्धहस्त। लघुकथा संग्रह ‘ईश्वर की कहानियाँ’ तथा ‘बच्चा और गेंद’ प्रकाशित। इनके अतिरिक्त 5 काव्य संग्रह,   5 कथा संग्रह,   3 लेख व निबंध संग्रह,   5 व्यंग्य संग्रह,   1 उपन्यास आदि अनेक मौलिक व संपादित कृतियाँ प्रकाशित। कथा,   कविता व समग्र लेखन के लिए अनेक बार सम्मानित। संप्रति दैनिक समाचार पत्रा ‘नई दुनिया’ के दिल्ली संस्करण में संपादन-कार्य।
बलरामउत्तर प्रदेश के जिला कानुपर के गाँव भाऊपुर बिठूर में 15 नवम्बर,   1951 को जन्म। शिक्षाकाल में ही वह पत्राकारिता से जुड़ गए थे शायद इसीलिए कुछ लघुकथाओं में उनकी भाषा व शिल्प पर रिपोर्टिंग की भाषा व शिल्प का प्रभाव स्पष्ट नजर आता है। इनके संपादन में प्रकाशित ‘काफिला’,   ‘कथानामा’ (भाग एक व दो),   हिन्दी लघुकथा कोश,   भारतीय लघुकथा कोश (भाग एक व दो),   विश्व लघुकथा कोश (भाग एक,   दो,   तीन व चार) तथा मानक हिन्दी लघुकथा कोश (भाग एक व दो) लघुकथा जगत की बड़ी उपलब्धियाँ हैं।
रामकुमार घोटड़राजस्थान के गाँव भैंसली,   जिला चुरू में 2 दिसम्बर,  1951 को जन्म। तिनके-तिनके,   प्रेरणा,   क्रमशः,   रूबरू,   आधी दुनिया की लघुकथाएँमेरी श्रेष्ठ लघुकथाएँ,   संसारनामा (सभी एकल लघुकथा-संग्रह),   थारी-महारी बाताँ (राजस्थानी में एकल लघुकथा-संग्रह),   अँधेरों की झलक,   लीक से हटकर (कहानी-संग्रह)एक व्यंग्य-संग्रह के अतिरिक्त अनेक लघुकथा-संकलन सम्पादित/प्रकाशित,   कुछ बाल साहित्य की पुस्तकें भी प्रकाशित। लघुकथाओं पर चार एम.फिल. तथा एक पीएच.डी. के लिए शोधकार्य। अनेक संस्थाओं द्वारा पुरस्कृत/सम्मानित।
माधव नागदा20 दिसम्बर,   1951 को राजस्थान के नाथद्वारा में जन्म। कहानी-संग्रह: उसका दर्द,   शापमुक्ति,   अकाल और खुशबू,   परिणिति तथा अन्य कहानियाँउजास (राजस्थानी में),   डायरी: फिर कभी बतलाएँगेे,   सोने के पाँखोंवाली तितलियाँ (राजस्थानी में),   लघुकथा-संग्रह: आग,   अपना-अपना आकाश।  सम्पादित लघुकथा-संकलन: पहचान। राजस्थान साहित्य अकादमी द्वारा ‘उसका दर्द’ कहानी-संग्रह पर सुमनेश जोशी पुरस्कार,   राष्ट्रीय हिन्दीसेवी सहòाब्दी सम्मान,   राजस्थान पत्रिका सृजनात्मक पुरस्कार,   साकेत साहित्य सम्मान,   राजस्थानी भाषा साहित्य एवं संस्कृति अकादमी द्वारा शिवचन्द्र भरतिया सम्मान।
कमलेश भारतीयपंजाब के होशियारपुर जिले में 17 जनवरी,   1952 को जन्मे कमलेश भारतीय हिन्दी समाचार पत्रा ‘दैनिक ट्रिब्यून’ से जुड़े पत्राकार हैं। उन्होंने अनेक विधाओं में लेखन किया है और अपने लेखन के प्रारम्भ से ही लघुकथा से जुड़े रहे हैं। अन्य कृतियों के अतिरिक्त उनके तीन लघुकथा-संग्रह ‘मस्तराम जिन्दाबाद’,  ‘इस बार’ तथा ‘ऐसे थे तुम’ भी प्रकाशित हो चुके हैं। लघुकथा में ‘कमलेश भारतीय ने लोककथा शैली का भी काफी प्रयोग किया और अपने इन प्रयोगों में वे सफल भी हुए हैं...।’
शकुन्तला किरणमूल नाम शकुन्तला अग्रवाल।  7 फरवरी 1952 को अजमेर  ‘हिन्दी लघुकथा’ विषय पर देश क्या,   विश्वभर में शोध हेतु पंजीकृत होने तथा शोधोपाधि (पीएच॰ डी॰) प्राप्त करने वाली पहली नागरिक। अनेक महत्वपूर्ण लघुकथाओं के अलावा दो सौ से अधिक लेख,   कहानियाँ,   कविताएँ-गीत-गजल आदि विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं,   विशेषांकों,   संकलनों व कोशों में प्रकाशित। आलोचना पुस्तक ‘हिन्दी लघुकथा’ तथा काव्य संग्रह ‘अहसासों के अक्स’ प्रकाशित। राजस्थानी व्रत-त्योहार सम्बन्धी लोक-कथाओं का सांस्कृतिक मूल्यांकन (शोधपरक दृष्टि)। सम्पादन सहयोग : न्यू लाइट,   प्रज्ञा,   देह से अदेह। कहानियाँ,   गीत व कविताएँ देश की प्रमुख पत्रा-पत्रिकाओं में प्रकाशित व आकाशवाणी से प्रसारित,   राजनीतिक एवं सामाजिक संगठनों में सक्रिय भागीदारी के उपरान्त अध्यात्म की ओर अग्रसर। निदेशिका,   मित्तल हास्पिटल एण्ड रिसर्च सेण्टर,   अजमेर।
मोहन राजेश 12 अप्रैल 1952 को ब्यावर (अजमेर) राजस्थान में। समकालीन
लघुकथा की पहली पीढ़ी के सम्मान्य हस्ताक्षर। 1968 से 1976  तक विभिन्न
पत्रा-पत्रिकाओं के सम्पादन से सम्बद्ध,   1977 से 1983 तक शासकीय महाविद्यालयों में प्राध्यापक,   उसके बाद राजस्थान पत्रिका व टी.वी. से सम्बद्ध।  अब तक 200 लघुकथाएँ,   50 कहानियाँ व 50 कविताएँ प्रकाशित।
रमेश बतरा  आठवें दशक के अग्रणी लघुकथा-लेखकों में रमेश बतरा एक थे। उनका जन्म 23 नवम्बर,   1952 को  जालन्धर (पंजाब) में हुआ था। वे लघुकथा के प्रबल पक्षधर थे और उसके बारे में गहन चिन्तन भी करते थे। लघुकथा की आवश्यकता के सम्बन्ध में उनका कहना था कि— ‘मनुष्य का स्वभाव रहा है कि वह अपनी बात कम से कम शब्दों में अधिक से अधिक आकर्षक ढंग से कहे।...जीवन जितना तीव्रतर होता जा रहा है,   उतना ही यह अधिकाधिक फैक्टर्ज़ में बंट रहा है और निश्चित रूप से जीवन के ये लघुतम टुकड़े ही अपने अहसासों के तहत लघुकथा को जन्म देते हैं। इस प्रक्रिया की प्रत्येक मनःस्थिति को तीर की तरह जितना लघुकथा में झोंका जा सकता है,   उतना कहानी में नहीं।’ ‘तारिका’ तथा ‘साहित्य निर्झर’ के लघुकथा विशेषांकों का सम्पादन कर आठवें दशक में लघुकथा की स्थापना के लिए महती कार्य किया। सारिका,   रविवार्ता तथा संडे मेल में सहायक/उपसम्पादक के रूप में कार्य किया। ‘समग्र’ के लघुकथा विशेषांक के प्रकाशन की योजना के पीछे भी वही थे। नंग-मनंग,   पीढ़ियों का खून,   फाटक (सभी कहानी-संग्रह),   बन्दीवान (अनुवाद : फखर जमान का उपन्यास)। 15 मार्च,   1999 को दिल्ली में देहावसान।

शेष आगामी अंक में…







                                                      हिन्दी लघुकथा का मनोविज्ञान                                                                                                                   लेखक : बलराम अग्रवाल                                                                                                        प्रकाशक : राही प्रकाशन,  एल-45,  गली नं॰ 5, करतार नगर, दिल्ली-110053                                                                                                    ई-मेल : rahiprakashan@gmail.com

शनिवार, 11 फ़रवरी 2017

समकालीन लघुकथा : विभिन्न आयाम-5 / बलराम अग्रवाल


पाँचवीं किस्त दिनांक 26-01-2017 से आगे… 

प्रमुख समकालीन लघुकथा लेखक : सामान्य परिचय-1

रावी(पूरा नाम रामप्रसाद विद्यार्थी 16-12-1911--9-9-1994) हिन्दी लघुकथा को
रावी:फोटो-सुनील अनुरागी के सौजन्य से
साहित्यिक पहचान देने की पहल करने वाले उल्लेखनीय कथाकार। रावी ने सन् 1948 से हिन्दी लघुकथा लिखना शुरू किया। उनकी पहली लघुकथा ‘शीशम का खूँटा’ उनके लघुकथा संग्रह ‘मेरे कथागुरु का कहना है’ भाग-
1 में संग्रहीत है। ‘कन्हैयालाल मिश्र ‘प्रभाकर’,   जगदीश चन्द्र मिश्र और हरिशंकर परसाई का नाम भी लघुकथा के लिए आदर से याद किया जाता है,   लेकिन रावी ने केवल लघुकथाएँ ही लिखीं। हाँ,   रावी की लघुकथाएँ आधुनिक लघुकथा से भिन्न हैं। वे प्राचीन बोधकथाओं के अधिक निकट हैं।
मेरे कथागुरु का कहना है’ शीर्षक से उनकी लघुकथाओं का पहला संग्रह सन् 1958 में व इसी नाम से दूसरा संग्रह 1961 में भारतीय ज्ञानपीठ द्वारा प्रकाशित किया गया था। रावी ने 30 से अधिक पुस्तकों की रचना की लेकिन ख्याति उन्हें इन्हीं पुस्तकों से मिली। ‘रावी का समग्र साहित्य सहज मानवीय संबंधों से परिपूर्ण आदर्श समाज की कल्पना का परिणाम है। इनकी लघुकथाएँ भी इनके ऐसे वैचारिक आग्रह से संचालित हैं, यहाँ तक कि 1961 के 23 वर्ष पश्चात् 1984 में प्रकाशित ‘रावी की परवर्ती लघुकथाएँ’ में भी उसी आग्रह,   उसी शैली के दर्शन होते हैं’मेरे कथागुरु का कहना है’ का प्रकाशन भारतीय ज्ञानपीठ द्वारा तब हुआ था,   जबकि हिन्दी साहित्याकाश में लघुकथा की चर्चा कनकैया (आसमान में उड़ने और कण-जैसी दिखने वाली एक चिड़िया) भर भी नहीं थी।
विष्णु प्रभाकरशरत्चन्द्र की जीवनी ‘आवारा मसीहा’ के लेखक के रूप में विशेष रूप
से ख्यात,   21 जून 1912 को उत्तर प्रदेश के जिला मुजफ्फरनगर में जन्मे विष्णु प्रभाकर का बचपन हरियाणा के जिला हिसार में बीता। उन्होंने साहित्य की लगभग हर विधा में लेखन किया। उनकी लघुकथाएँ मानवीय आदर्श की विशेष पैरवी करती हैं। स्वयं प्रभाकर जी के अनुसार— ‘मेरी पहली लघुकथा ‘सार्थकता’ ‘हंस’ के जनवरी 1939 के अंक में प्रकाशित हुई थी।’ इसी ‘निवेदन’ के प्रारम्भ में वे लिखते हैं— ‘मेरी लघु रचनाओं का यह तीसरा संग्रह है। पहला संग्रह ‘जीवन पराग’ सन् 1963 में सस्ता साहित्य मंडल,   दिल्ली से प्रकाशित हुआ था।... वे सभी सत्य पर आधारित थीं परन्तु सत्य मात्र होने के कारण कोई रचना कहानी नहीं बन जाती,   इसलिए मैंने उन्हें लघुकथा कहकर रेखांकित नहीं किया था।’ ‘जीवन पराग’ की रचनाओं को प्रभाकर जी ने बाल-साहित्य के अन्तर्गत माना है। परन्तु अशोक भाटिया का मानना है कि ‘सन् 1951 में प्रभाकर जी की बोधपरक कथाओं का संग्रह ‘जीवन पराग’ नाम से प्रकाशित हुआ था। उसी संग्रह की कथाओं में कुछ और नई कथाएँ जोड़कर सन् 1982 में उन्होंने नया संग्रह ‘आपकी कृपा है’ नाम से प्रकाशित कराया।’
अपने लघुकथा लेखन के संबंध में प्रभाकर जी का मानना था कि— ‘मैंने जिस रूप में कहानी और एकांकी की विधा को अपनाया,   उस रूप में लघुकथा को नहीं।’ फिर भी,  लघुकथा की जनव्याप्ति को स्वीकारते हुए वे कहते हैं— ‘जब अणु की शक्ति अपरिमित है,   तब लघुकथा मात्र लघु रचना कैसे रह सकती है?’
11 अप्रैल,   2009 को नई दिल्ली में उनका निधन हो गया।
हरिशंकर परसाईमध्य प्रदेश के जिला होशंगाबाद के जमानी में 22 अगस्त 1924 को जन्मे परसाई जी समकालीन हिन्दी व्यंग्य के शीर्ष पुरुष हैं। सन् 1950 के आसपास उन्होंने अनेक लघुकथाएँ लिखीं जो मुख्यतः तत्कालीन राजनीति में व्याप चुके भ्रष्टाचार एवं मूल्यहीनता को केन्द्र में रखकर रची गई हैं। उनकी लघुकथाओं में व्यंग्याश्रित संवेदना ही अधिक मिलती है। 1981 में प्रकाशित उनकी कृति 'विकलांग श्रद्धा का दौर' के अतिरिक्त सुप्रसिद्ध समालोचक धनंजय वर्मा द्वारा संपादित ‘परसाई समग्र’ के भाग 12 में उनकी लघुकथाएँ संकलित हैं। 
10 अगस्त 1995 को उनका निधन हो गया।
युगलबिहार के मोहिउद्दीन नगर जिला समस्तीपुर में सन् 1925 की दीपावली (तदनुसार, 17 अक्टूबर 1925) के दिन जन्मे युगल जी के ‘किरचें’,   गर्म रेत’,   जब द्रोपदी नंगी नहीं हुई’,   पड़ाव से आगे’ तथा ‘फूलों वाली दूब’ लघुकथा संग्रह आ चुके हैं।  इनके अलावा तीन उपन्यास,   तीन कहानी-संग्रह,   तीन नाटक,   दो कविता-संग्रह,   दो निबन्ध-संग्रह प्रकाशित। 1948  से 1962 तक अनेक दैनिक,   साप्ताहिक,   पाक्षिक,   मासिक,   त्रौमासिक,   अर्द्धवार्षिक पत्रा-पत्रिकाओं के उपसम्पादक/सम्पादक रहे। 2003 से कुछ समय तक उन्होंने ‘फलक’ नाम से लघुकथा-केंद्रित एक द्वैमासिक लघु-पत्रिका भी संपादित की थी। उन्होंने साहित्य की लगभग सभी विधाओं में लेखन किया है। देश के अनेक पत्रों को युगल जी ने संपादक-उप संपादक के तौर पर सेवा प्रदान की। अनेक प्रतिष्ठित संस्थानों द्वारा मानद उपाधियों तथा अलंकरणों से सम्मानित व पुरस्कृत।  
26 अगस्त 2016 की प्रातः मोहिउद्दीन नगर में उनका निधन हो गया।
सूर्यकांत नागरमध्य प्रदेश के जिला शाजापुर में 3 फरवरी 1933 को जन्म। अनेक विधाओं में लेखन-प्रकाशन। अनेक साहित्यिक पत्रिकाओं का संपादन। दो उपन्यास,   नौ कहानी संग्रह,   दो निबंध संग्रह,   एक पत्रा संग्रह,   एक लघुकथा संग्रह ‘विषबीज’,   तीन सम्पादित लघुकथा संकलन,   एक आत्मकथ्य तथा लघुकथा-आलोचना पर अनेक लेख तथा लघुकथा संग्रह 'विषबीज' प्रकाशित। अनेक साहित्यिक संस्थाओं द्वारा सम्मानित।
उर्मि कृष्णमध्य प्रदेश के जिला हरदा में 14 अप्रैल 1938 को जन्म। कहानी,   उपन्यास,   यात्रा,   व्यंग्य,   नाटक और बाल साहित्य की लगभग अठारह पुस्तकें प्रकाशित। विभिन्न रचनाओं का ब्रेल,   गुजराती,   मराठी व पंजाबी में अनुवाद। मध्य प्रदेश का सर्वोच्च ‘अक्षर आदित्य’ सम्मान तथा तीन कृतियों पर हरियाणा साहित्य अकादमी द्वारा पुरस्कृत। रचनाकर्म पर पीएच.डी. एवं शोध।अनेक साहित्यिक संस्थाओं द्वारा सम्मानित। कहानी लेखन महाविद्यालय, अम्बाला छावनी की संचालिका।
पृथ्वीराज अरोड़ावर्तमान पाकिस्तान स्थित सिखों के पवित्र-धाम ननकाना साहिब के ग्राम बूचेकी में 10 अक्टूबर 1939 को जन्म। आठवें दशक के महत्वपूर्ण हस्ताक्षर। लघुकथा-संग्रह ‘तीन न तेरह’ व ‘आओ इंसान बनाएँ’ के अलावा एक उपन्यास ‘प्यासे पंछी’,   कहानी संग्रह ‘पूजा’  भी प्रकाशित। कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय को प्रशासनिक सुपरिन्टेंडेंट पद से सेवानिवृत्त। ‘लघुकथा शिखर सम्मान’ से सम्मानित,   लघुकथाओं पर लघु शोध प्रबन्ध। 
20 दिसम्बर 2015 को करनाल स्थित अपने घर में उनका निधन हो गया।
सतीश दुबे— 12 नवंबर 1940 को इंदौर में जन्मे सतीश दुबे जी को समकालीन लघुकथा का महत्वपूर्ण स्तंभ माना जा सकता है। ‘सिसकता उजास’,   भीड़ में खोया आदमी’,   राजा भी लाचार है’ तथा ‘प्रेक्षाग्रह’ सहित अनेक लघुकथा संग्रह,    एक शोध-प्रबन्ध,   पंजाबी,   मराठी,   गुजराती,   बांग्ला तथा तेलगु में लघुकथाएँ अनूदित एवं उनके संग्रह प्रकाशित,   एक पत्र-संग्रह,   बाल एवं प्रौढ़ साहित्य की छह पुस्तकें तथा अनेक सम्पादित पुस्तकें। अनेक राष्ट्रीय पुरस्कार प्राप्त,   विभिन्न संस्थाओं द्वारा सम्मानित,   उपन्यास पर फिल्म का निर्माण तथा शोधछात्रों द्वारा शोध-प्रबन्ध एवं लघु शोध-प्रबन्ध लेखन।
25 दिसम्बर, 2016 को इन्दौर में निधन।
सिमर सदोष— 2 अप्रैल,   1943 को गाँव खन्ना लुबाना,   जिला शेखपुरा (अब पाकिस्तान) में। एक मुट्ठी आसमाँ (लघुकथा-संग्रह),   एक और पारो,   धूप की लकीर (कहानी-संग्रह),   सफर जारी है (कविता-संग्रह),   दैनिक हिन्दी मिलाप तथा दैनिक वीर प्रताप में दो उपन्यास धारावाहिक प्रकाशित,   अनेक रचनाएँ दूसरी भाषाओं में अनूदित एवं प्रकाशित,   आकाशवाणी तथा दूरदर्शन से रचनाओं का निरन्तर प्रसारण,   कुछ रचनाएँ पाठ्यक्रमों में सम्मिलित।  अजीत समाचार (हिन्दी),   जालन्धर में समाचार सम्पादक। राष्ट्रपति से मानद सम्मान सहित अनेक संस्थाओं द्वारा सम्मानित/पुरस्कृत।
विक्रम सोनी— 25 मई 1943 को बैकुण्ठपुर,   कोरिया,   छत्तीसगढ़ में जन्मे सोनी जी को लघुकथा की सिरमौर पत्रिका ‘लघु आघात’ का संपादन करने का श्रेय प्राप्त है। जनवरी 1989 में इनकी 30 लघुकथाओं का संग्रह ‘उदाहरण’ प्रकाशित हुआ। लघुकथा संकलन ‘पत्थर से पत्थर तक’,   छोटे छोटे सबूत’,   मानचित्र’,   दरख्त’ का भी संपादन किया। राजकीय सेवा से निवृत होने के बाद पक्षाघात के शिकार हो उज्जैन स्थित अपने निवास पर कायिक रूप से असहाय पड़े रहे। 
4 जनवरी 2016 को उज्जैन स्थित अपने घर में उनका निधन हो गया।
रूप देवगुण— 1 नवम्बर,   1943 को नरवड़ (लाहौर,   अब पाकिस्तान ) में।  लघुकथा के वरिष्ठ हस्ताक्षर। छह कहानी-संग्रह,   तेरह कविता-संग्रह,   चार एकल लघुकथा-संग्रह,   एक गजल-संग्रह,   एक लघुकथा निबन्ध-संग्रह,   एक पंजाबी कहानी-संग्रह,   एक समीक्षात्मक पुस्तक तथा लघुकथा के दस से अधिक सम्पादित संकलन। अनेक संस्थाओं द्वारा सम्मानित/पुरस्कृत।
रामकुमार आत्रेय— 01 फरवरी,   1944 को हरियाणा अन्तर्गत जिला कैथल के करोड़ा नामक गाँव में जन्मे आत्रेय जी के तीन लघुकथा संग्रहइक्कीस जूते,   आँखों वाले अंधे तथा छोटी-सी बात,   बिना शीशों का चश्मा के अतिरिक्त चार कविता संग्रह तथा तीन-बाल-कथा संग्रह प्रकाशित हो चुके हैं। ‘पिलूरे तथा अन्य कहानियाँ’ कहानी संग्रह।  अध्यापन कार्य से काफी समय पूर्व स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति लेने के उपरान्त सम्प्रति स्वतन्त्र लेखन कर रहे हैं। हिन्दी की लगभग सभी सम्मानित पत्र-पत्रिकाओं में रचनाएँ लगातार प्रकाशित। हरियाणा साहित्य अकादमी से पुरस्कृत,   'दैनिक भास्कर' पत्र तथा 'वर्तमान साहित्य' पत्रिका व विभिन्न संस्थाओं द्वारा सम्मानित।
भगीरथकुछ लोगों को भगीरथ और भगीरथ परिहार,   इन दो नामों वाले दो अलग-अलग लेखक होने का भ्रम हो सकता है,   लेकिन ये एक ही व्यक्ति के दो नाम हैं। इनका जन्म 2 जुलाई,   1944 जिला पाली (राजस्थान) के अन्तर्गत ग्राम सेवाड़ में हुआ। समकालीन लघुकथा की पहली पीढ़ी के महत्वपूर्ण हस्ताक्षर। लघुकथा-संकलन ‘गुफाओं से मैदान की ओर’ (रमेश जैन के साथ),   राजस्थान की सर्वश्रेष्ठ लघुकथाएँ’,  पंजाब की सर्वश्रेष्ठ लघुकथाएँ’ लघुकथा-केन्द्रित अनियतकालीन पत्रिका ‘अतिरिक्त’ का 1972 से 1974 तक तथा कविता-केन्द्रित अनियतकालीन पत्रिका ‘मोर्चा’ व ‘अलाव’ का 1975 से 1977 तक सम्पादन-प्रकाशन। लघुकथा-संग्रह ‘पेट सबके हैं’ प्रकाशित।
चित्रा मुद्गल— 10 दिसंबर 1944 को तमिलनाडु के चेन्नै नगर में जन्मी चित्रा जी इन दिनों प्रतिष्ठित उपन्यास लेखिका हैं,   लेकिन लघुकथा-लेखन से इनका नाता आठवें दशक से ही है। लघुकथा की तत्कालीन प्रतिष्ठित पत्रिकाओं ‘लघु आघात’,   सारिका’ आदि में इनकी लघुकथाएँ लगातार स्थान पाती रही हैं। ग्यारह कहानी-संग्रह,  चार उपन्यास,   चार बालकथा-संग्रह,   पाँच सम्पादित पुस्तकें,   गुजराती से दो अनूदित पुस्तकें तथा दो वैचारिक संकलन तथा छह सम्पादित कृतियाँ प्रकाशित। इनकी लघुकथाओं का संग्रह ‘बयान’ (2003) भारतीय ज्ञानपीठ,   नई दिल्ली से प्रकाशित हो चुका है। उपन्यास ‘आवाँ’ विश्वभर में चर्चित,   कथा यू.के. आदि अनेक अन्तर्राष्ट्रीय व राष्ट्रीय सम्मान व पुरस्कार। संप्रति स्वतन्त्र लेखन। अनेक राष्ट्रीय एवं अन्तर्राष्ट्रीय साहित्यिक संस्थाओं द्वारा सम्मानित।


इस समूची श्रंखला में प्रकाशित सभी लेखों को एक जगह पढ़ने के लिए मँगाएँ…
हिन्दी लघुकथा का मनोविज्ञान, लेखक : बलराम अग्रवाल, प्रकाशक : राही प्रकाशन, एल-45, गली नं॰ 5, करतार नगर, दिल्ली-53

शेष आगामी अंक में…